Tuesday 10 January 2012

गम किस बात का ?


बहुत से लोग गाँधी की बात नही समझ पाये.
बहुत से लोग सुकरात की बात नही समझ पाये .
बहुत से ईसा की बात नही समझ पाये.
बहुत से ओशो की बात नही समझ पाये .
और अब अन्ना की बात नही समझ पा रहे हैं.
तो अगर मेरी बात नही समझ पाये तो क्या गम है .

2 comments:

  1. वाह.. बिल्कुल ठीक कहा है, जब कोई आप की बात न समझ पाए तभी मानना चाहिए कि हमारी बात में कुछ दम है...

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  2. तो अगर मेरी बात नही समझ पाये तो क्या गम है ...
    अब लोगों की समझ ही छोटी हो तो क्या कीजे...
    अच्छी रचना...

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