Tuesday 21 February 2012

सोहनी की छोटी बहिन -भाग -८

सोहनी की छोटी बहिन उससे चार साल छोटी थी वह उसके साथ ही सोती थी और सोने से पहले वो दोनों एक दूसरे की उँगलियों में बिना छुवाये रिंग डालने का खेल खेला करते थे.
उस समय नल चलाकर पानी भरा जाता था ,चलाते समय उसने अपना हाथ उस नल के मुँह में डाल दिया और उसकी छोटी उँगली  में चोट लग गई खून निकल आया अभी भी निशान है .
नहाने के लिए पानी गर्म किया जाता था एक बड़े कनस्तर में ,एक बार उसकी भाप से उसका पूरा चेहरा झुलस गया उसी समय उसे एक बुजुर्ग अनुभवी डाक्टर के पास ले गए उसका इलाज इतना अच्छा था कि ठीक होने पर जरा भी निशान नही रहा, चेहरा पहले जैसा ही आकर्षक हो गया.
उसकी छोटी बहिन को उसके दादाजी ने अमृत नाम दिया था.और वाकई वह अमृत जैसी पवित्र है .स्कूल में एकबार वह इंदिरा गाँधी भी बनी थी .
पढ़ाई-लिखाई में सबसे तेज थी .एकबार उसकी टीचर ने उस पर नकल करने का आरोप लगा दिया था तो उसने पत्र लिखा था किआरोप गलत है.
उसे बहुत सारी कवितायें याद थी कोई घर में आता तो उसे सुनाने को कहा जाता.और अब वह खुद कवितायें लिखती है .

1 comment:

  1. वाकई सोहनी की स्मृतियाँ बहुत मोहक हैं, बचपन में मन का दर्पण स्वच्छ होता है उस पर जो अंकित हो जाये वह बना रहता है.

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