Monday 20 February 2012

सोहनी का छोटा भाई -भाग -७

उसका छोटा भाई उससे छह साल छोटा था .जब वह ढाई तीन साल का रहा होगा तो उसे काफी तेज बुखार चढ़ा था बुखार तो उतर गया पर कमजोरी के कारण उसने चलना बंद कर दिया.
 चिंता हो गयी कि कहीं पोलियो जैसी बात तो नही हो जाyeगी पर उन्ही दिनों हम सब ट्रेन से दूसरे शहर गए थे ,ट्रेन में एक नए महौल में आते ही उसमे बदलाव आता गया ,ट्रेन की खिड़की की रेलिंग पकड़- पकड़ कर खड़ा होना शुरू कर दिया,चलने की कोशिश करने लगा .कुछ ही दिनों में तन्दरुस्त हो गया .
उसे स्कूल जाना पसंद नही था,इसलिये कई बार वह स्कूल से भाग कर वही नजदीक ही रहने वाली पापाजी की चाचीजी के घर चला जाता.
सर्दियों के मौसम में ठंड से उसके गाल और पैर फट जाते थे.फिर उस पर वैसलीन लगाई जाती थी .
जब वह दस साल का था तो दीपावली के समय बीस रूपए लेकर कुछ सामान लेने गया था पर उससे रुपये गुम हो गए थे .
बड़े होने पर उसे मुहांसो ने काफी तंग किया.अभी वह आठवीं में ही था कि सोहनी की शादी हो गयी .एक बार वह सोहनी को ट्रेन से ससुराल छोड़ने भी गया था .टिफिन लेकर गए थे पर रास्ते में ट्रेन में उन्हें खाने में संकोच हो रहा था .घर पहुंचकर ही खाया.
उसके भाई को म्यूजिक का शौक था ,इसलिये उसने बैन्जो बजाना सीखा था ,और इसी कला ने उसे तब बहुत सहारा दिया जब वह इंजीनीयर बनने के लिए होस्टल गया था .
वहाँ जमकर रैगिंग हुई थी ,एकबार तो उसका मन हुआ कि पढ़ाई छोड़कर वापिस आजाये ,पर पापा जी ने हिम्मत दी और फिर जब होस्टल में उसने बैंजो बजाया तो रैगिंग खत्म हो गयी . सबने बैंजो सुनना शरू कर दिया.

1 comment:

  1. वाह, संगीत का जादू सर चढ़ कर बोलने लगा... बहुत सुंदर पोस्ट !

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