Friday 6 May 2011

नए युग की शुरुआत

अभी भी कुछ लोगों के मन में लादेन के मरने का अफ़सोस है .ऐसा ही रहा तो दूसरे लादेन को जन्म लेने में ज्यादा देर नही लगेगी. ढेर सारे व्यक्तियों के दिल की सदभावनाएँ अच्छाईयां किसी एक व्यक्ति के माध्यम से काम करती हैं जैसे की अन्ना हजारे जिन्होंने जनकल्याण के लिये अनशन का बिगुल बजाया .अभी सफलता मिलनी बाकी है पर उसके लिये अभी हमे अपनी सद्भावनाओं में कमी नही लानी है.इसी का नतीजा है ओसामा जैसे आतंकवादी से मुक्ति.हमारे दिल की नफ़रत और बुराइयों ने ही उसे जन्म दिया था. सीधे -सीधे अन्नाह्जारे ने लादेन को मारने की मुहिम भले ही नही छेड़ी थी . पर उससे क्या होता है.हमारे मन के अच्छे और बुरे भावों का ही तो सारा खेल है.

2 comments:

  1. वाह, कितनी दूर की कौड़ी लायी हैं आप, सचमुच सारा खेल विचारों व भावों का ही है, इसलिये संत जन कहते हैं अच्छा सोचो, अच्छा पढ़ो, अच्छा कहो तो कर्म भी अच्छे होने लगेंगे !

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  2. मन के अच्छे और बुरे भावों का ही तो सारा खेल है. bilkul theek kaha.

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